पता: मथुरा:
मथुरा, उत्तर प्रदेश का एक शहर है। इसे भगवान कृष्ण की जन्मस्थली के नाम से जाना जाता है। यह भारत के सात पवित्र स्थलों में से एक है. मथुरा, यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है।
पता: मथुरा:
मधुवन, ब्रज का एक प्रमुख वन है और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का स्थल भी रहा है. यह मथुरा ज़िले में स्थित है. मधुवन को ब्रज का सबसे प्राचीन वन माना जाता है।
पता: मथुरा:
कुमुदवन में कुमुदिनी कुंड है, जिसे विहार कुंड के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि श्री कृष्ण स्वयं इस कुंड में अन्य ग्वालबालों के साथ क्रीड़ा करते है।
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श्री कृष्ण ने शांतनु को वरदान दिया था कि जो भी इस कुंड में स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी। यहां के लोगों का कहना है कि इस कुंड से हजारों-लाखों लोगों को संतान की प्राप्ति हो चुकी है।
पता: मथुरा
बहुलावन, मथुरा ज़िले का एक पड़ाव स्थल है. यह ब्रज चौरासी कोस का चौथा पड़ाव है. यह श्रीकृष्ण की लीला भूमि रही है. यहां बहुला नाम की एक गाय को एक बाघ ने घेर लिया था।
पता: मथुरा
कुसुम सरोवर, उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित एक पवित्र जल कुंड है. यह गोवर्धन पहाड़ी पर मानसी गंगा और राधा कुंड के बीच में है. यह सरोवर राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है।
पता: मथुरा:
चंद्र सरोवर, मथुरा के गोवर्धन पर्वत के पास स्थित एक सरोवर है. इसे पारसोली, सूर श्याम सरोवर, और महमदपुर के नाम से भी जाना जाता है. यह सरोवर, भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली के रूप में प्रसिद्ध हैं।
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श्री गोविंद स्वामी (1505 - 1586), पुष्टिमार्ग के अष्ठछाप कवियों में से एक थे, जो गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी के शिष्य थे । इन्होने ब्रज में इसी स्थान पर निवास कर भजन किया, जो ऐरावत कुंड, जतिपुरा के पास स्थित है।
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ड़ीग बेहेज — भरतपुर ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है, जो कभी जाट राजाओं की राजधानी भी रहा। यह स्थान अपनी भव्य जलमहलों, गढ़, और ब्रज संस्कृति से जुड़ी विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
पता: मथुरा:
परमदरा में प्रदेश का एकमात्र सुदामा मंदिर है, वे भगवान श्रीकृष्ण के सखा थे। श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम ने इसी गांव में मल्ल विद्या का हुनर सीखा था।
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कामवन, ब्रज का एक प्रसिद्ध तीर्थ है. इसे काम्यवन भी कहा जाता है. यह राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित है. कामां, कामवन का ही वर्तमान नाम हैं।
पता: मथुरा:
बरसाना भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा ज़िले में स्थित एक नगर है। यह नगर हिन्दू देवी राधा के जन्मस्थल के रूप में भी प्रचलित हैं।
पता: मथुरा:
ब्रज क्षेत्र में करहला एक प्राचीन स्थल है जो भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। यह स्थान विशेष रूप से कंस के अत्याचारों और कृष्ण की बाल लीलाओं के संदर्भ में प्रसिद्ध है।
पता: मथुरा:
संकेत वन, मथुरा के पास स्थित एक पवित्र स्थल है. मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण ने राधा से विवाह किया था. इसे महारास स्थल के नाम से भी जाना जाता हैं।
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नंदगांव, उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है. यह भगवान श्रीकृष्ण के पालक नंद बाबा के नाम पर बसा हैं।
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बढेन" या "बढ़ैन" कोई ब्रज क्षेत्र का गांव है, तो संभव है कि वह इस यात्रा का हिस्सा हो। कुछ कम प्रसिद्ध गांवों का ज़िक्र परंपरागत रूप से यात्रा में होता हैं।
पता: मथुरा:
कोटवन मथुरा जिले, उत्तर प्रदेश, भारत का एक गाँव है। यह हिन्दूमत की मान्यता के अनुसार वह स्थान है जहाँ कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और ब्रज भूमि के मुख्य स्थानों में से एक है। यह गाँव आगरा से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
पता: मथुरा:
ब्रज क्षेत्र में कोसी एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। यह स्थान विशेष रूप से गोवर्धन परिक्रमा और ब्रज यात्रा के लिए प्रसिद्ध है।
पता: मथुरा:
इस यात्रा को लेकर यह भी मान्यता है कि 84 कोस परिक्रमा करने से व्यक्ति को 84 लाख योनियों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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जिसे 'शेरगढ़ का किला' कहा जाता हैं। कैमूर की पहाड़ियों पर मौजूद इस किले की बनावट दूसरे किलों से बिल्कुल अलग है। यह किला इस तरह से बनाया गया है कि बाहर से यह किला किसी को भी नहीं दिखता। किला तीन तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है।
पता: मथुरा:
चीर घाट यमुना नदी के तट पर सबसे पवित्र घाटों (नीचे की तरफ सीढ़ियों की एक श्रृंखला) में से एक है। यह वह स्थान है जहाँ वृंदावन में गोपियों के वस्त्र चोरी करने की लीला श्री कृष्ण ने द्वापर युग में सम्पन्न की थी ।
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ब्रज क्षेत्र में बच्छबन (या वत्सवन) भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा एक पवित्र वनक्षेत्र है। यह स्थान विशेष रूप से बछड़ों के साथ कृष्ण की लीलाओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
पता: मथुरा
वृंदावन, उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित एक धार्मिक शहर है. इसे 'ब्रज का हृदय' कहा जाता है. यह भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं का स्थल माना जाता है. वृंदावन को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता हैं।
पता: मथुरा:
लोहवन में जो काली सी मूर्ति है वह लोहजङ्घ ऋषि की है, जिसे देवताओं ने स्थापित की थी । लोहवन का नाम लोहजङ्घ ऋषि के नाम पर रखा गया है । उन्होंने यहाँ ब्रज प्राप्ति के लिए तप किया था।
पता: मथुरा:
ब्रज भाषा की लोक संस्कृति में अपने से बड़े को सम्बोधन में 'दाऊजी' कहा जाता है, इसलिए बड़ा भाई होने के नाते बलराम को 'दाऊजी' भी कहा जाता है।
पता: मथुरा:
गोकुल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा ज़िले में स्थित एक नगर है।
पता: मथुरा:
भांडीरवन, वृंदावन में स्थित एक पवित्र वन है. यह वही जगह है जहां ब्रह्मा जी ने राधा और कृष्ण का विवाह कराया था।
पता: मथुरा:
गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अंतर्गत एक नगर पंचायत है। गोवर्धन व इसके आसपास के क्षेत्र को ब्रज भूमि भी कहा जाता हैं।

ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा यात्रा, जो भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्थलों का भ्रमण है, लगभग 252 से 300 किलोमीटर की होती है।
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा-इस परिकमा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्थल, सरोवर, वन, मंदिर, कुण्ड आदि का भ्रमण किया जाता है।
यह सम्पूर्ण यात्रा लगभग 360 किमी० की है, जिसे यात्री श्रद्वालु पैदल भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठान करते हुए लगभग 40 दिनों में पूरा करते है।
यात्रा का अर्थ:यह यात्रा ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, आदि) के धार्मिक स्थलों की यात्रा है।
दूरी:एक कोस लगभग 3.5 किलोमीटर का होता है, इसलिए 84 कोस लगभग 252 से 300 किलोमीटर के बराबर होता है।
समय:इस यात्रा को पूरा करने में 7 से 10 दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।
महत्व:मान्यता है कि इस परिक्रमा को करने से 84 लाख योनियों से मुक्ति मिलती है और जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते है।
मार्ग:यह यात्रा मथुरा के अलावा राजस्थान और हरियाणा के होडल ज़िले के गांवों से होकर गुजरती है।
अन्य नाम:इसे ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा भी कहा जाता है।