एक समय श्री दामोदरदासजी की गोद में सो रहे थे तभी श्रीनाथजी पधारे। तब दामोदरदासजी ने श्रीनाथजी को दूर ही खड़े रहने को कहा। श्री नाथजी दूर ही खड़े रहे लेकिन आपके नूपुर सुनकर श्री महाप्रभुजी जाग गये और श्रीनाथजी को अपनी गोद में बैठाकर श्री कपोल परसि के