श्री गोवर्धननाथ जी

4.कुमुदवन

4.कुमुदवन

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कमोदकण्ड के ऊपर श्याम तमाल के नीचे आप श्री ने तीन दिन तक भागवत् पारायण किया।

वैष्णवों के आग्रह पर आपने गीताजी का यह वाकय कहा- "दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य में योगमेश्वरम" जिस वैष्णवों को दिव्य चक्षु द्वारा कमोद, कमोदिनी सहित ज स्नान की लीला का महल आदि