श्री यमनाजी के तट पर छोकर वृक्ष के नीचे प्रभविराजित है। यहां पर श्रावण स्दी 11 की अर्थ रात्रि का प्रभश्री गोवर्धनधर ने महाप्रभुञ्जी को दैवी जीवों के उद्धारार्थ ब्रा संबंध दीक्षा देने की आज्ञा की है।
आप श्री ने श्रीनाथजी को पवित्रा धराकर मिश्री भोग धराया